Saturday, August 17, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

नियोक्ता संगठनों, श्रम संगठनों और राजनेताओं, सबने मिलकर नये क़ानून का मसौदा तैयार किया, जिसे मार्च 2019 में संसद ने पास किया. अक्तूबर में इस पर आख़िरी मुहर लगनी है.
इसलिए इस विचार का बहुत कम विरोध हुआ, हालांकि कुछ संगठन प्रतिनिधियों को चिंता है कि दूर से काम करने पर काम और निजी ज़िंदगी के बीच का फर्क मिटने लगेगा.
ट्रेड यूनियनों के केंद्रीय संगठन, SAK की वकील अनु-तुइजा लेहटो कहती हैं, "इसमें जोखिम है. नियोक्ता कर्मचारी को बहुत अधिक काम दे सकते हैं और वह यह कह नहीं पाएगा कि इतने काम के लिए समय नहीं होगा. कर्मचारी को अपना ख्याल ख़ुद रखना है."
कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच लिखित करार के बाद भी स्टाफ को ऐसा महसूस होगा कि उन्हें हर समय ई-मेल देखते रहना चाहिए और फ़ोन कॉल्स का जवाब देते रहना चाहिए. इसका नतीजा होगा बिना वेतन का ओवरटाइम करना.
दुनिया भर में हुए शोध भी यही निष्कर्ष देते हैं कि अनियमित घंटों में काम करने वाले लोग निर्धारित घंटे काम करने वालों की तुलना में अधिक समय तक काम में लगे रहते हैं.
ईरो वारा का कहना है कि नये क़ानून के मुताबिक ख़ुद को ढाल रही कंपनियों के लिए संचार महत्वपूर्ण होगा.
मैनेजरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कर्मचारी ज़रूरी काम पूरे कर रहे हैं और व्यवसाय से जुड़े हुए महसूस कर रहे हैं.
"हो सकता है कि लोगों को पता ही न चले कि उनके सहकर्मियों या परियोजनाओं के साथ क्या हुआ है या उन्हें लगने लगे कि उन्हें सब कुछ बताया नहीं जा रहा."
वारा के मुताबिक इससे उस भरोसे का स्तर घटता चला जाएगा, जिसने फ़िनलैंड को कामकाजी लचीलापन अपनाने की जगह तक पहुंचाया है.
एक और प्रमुख चिंता सामाजिकता की है. ऑफिस की कॉफी दुकानों के पास मिलना-मिलाना हो जाता है. दूर बैठकर काम करने पर यह नहीं हो सकता.
फ्रीलांसिंग और छोटी अवधि के करार इस इकॉनमी की ख़ासियतें हैं. काम के लचीले घंटे भी गिग इकॉनमी की एक ख़ासियत है.
नया क़ानून लागू होने पर किसी एक जगह पर एक नियोक्ता के लिए काम करने वाले ज़्यादा लोग नहीं होगे.
उनकी नौकरियां मौजूदा क़ानूनों और नियोक्ता संगठनों और श्रम संघों के बीच हुए करार पर चल रही हैं. आगे ऐसा नहीं होगा.
मतलब यह है कि आने वाले क़ानून से संरक्षित लोगों की संख्या घटती जाएगी और लोगों को स्थायी नौकरी करने वाले लोगों से भी कम लचीली कार्य स्थितियां मिल सकती हैं.
वारा कहते हैं, "कर्मचारियों के ऐसे नये समूह सामने आ सकते हैं जो क़ानून से कम संरक्षित होंगे और उनको अपने अधिकारों का पता भी नहीं होगा."
"इसी तरह कंपनियों के मैनेजरों को भी पूरा पता नहीं होगा कि क्या सही है और ग़लत."
इन चुनौतियों के बावजूद वारा को लगता है कि फ़िनलैंड दुनिया भर के लिए लचीले कामकाज का एक प्रतीक बना रहेगा.
"फ़िनलैंड और नॉर्डिक देशों में सिर्फ़ बड़े नाम वाली कंपनियां लचीले कामकाज की पेशकश नहीं कर रही हैं. सभी जगह सकारात्मक रूप से ऐसा हो रहा है. इससे सभी के लिए चीज़ें बेहतर होंगी."
मारिया 01 के एक कैफे में तीन सहकर्मियों के साथ लंच के लिए आई सेल्स मैनेजर टिया पानानेन कहती हैं, "मुझे तो ऑफिस से ही काम करना पसंद है क्योंकि आसपास की टीम मुझे पसंद है."
उनको डर है कि अगर नये क़ानून के बाद ढेर सारे लोग घर से काम करने लगे तो ऑफिस खाली हो जाएंगे.
"हो सकता है कि पूरे शहर में कैफेटेरिया और रेस्तरां खुल जाएं और लोग वहीं से काम करने लगें."
वारा यहां नेताओं और बिजनेस लीडर्स के लिए भी चुनौती देखते हैं. उनको लगता है कि फ़िनलैंड भी दूसरे कई देशों की तरह स्थायी नौकरियों से हायर और फायर वाली गिग इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है.